Wednesday, 31 August 2017

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Saturday, February 3, 2018

सलमान खान का जीवन और सफलता की कहानी salman khan biography and success story in hindi

सलमान ख़ान

सलमान खान का पूरा नाम ‘अब्दुल रशीद सलीम सलमान खान ‘(उर्दू: سلمان خان उच्चारण : Salman khan, जन्म : 27 दिसम्बर 1965) ये एक भारतीय फिल्म अभिनेता, निर्माता और एक प्रसिद्ध टेलीविज़न कलाकार है। लोग उन्‍हें प्‍यार से सल्‍लू भाई, भाईजान आदि नामों से पुकारते हैां उन्‍होंने अपने करियर में कई छोटी-बड़ी फिल्‍मों में काम किया और धीरे धीरे उनके प्रशंसकों की संख्‍या लगातार बढ़ती गईा उन्‍होंने इंडस्‍ट्री में अपना एक अलग मुकाम स्‍थापित किया है और वे हिंदी सिनेमा के अग्रणी अभिनेताओं में से एक हैं। मौजूदा समय में उन‍की फैन फालोइिंग का ये आलम है कि उनके घर (गैलक्‍सी अपार्टमेंट्स) के बाहर उनके चाहने वालों की भीड़ लगी रहती है। उनके फैंस की दीवानगी कुछ ऐसी है कि उनकी एक झलक पाने के लिए उनके प्रशंसक बेताब रहते हैं।

शुरूआती जीवन

सलमान खान ये चलचित्र लेखक सलीम खान और उनकी पहली पत्नी सुशीला चारक (सलीम खान की पहली पत्नी) के सबसे बड़े बेटे है. उनके पिता के पैतृक ये अफगानिस्तान के पश्तून से थे जो बाद में इंदोर, मध्यप्रदेश आके बसे।  खान भाइयो की माता ये हिंदु थी, जिसके पिता बलदेव सिंह चरक जम्मू-कश्मीर से आये थे और माता महाराष्ट्र से।  सलमान खान ये बताते है की वे हिंदु और मुस्लिम दोनों ही है।

सलमान ख़ान (Salman Khan) की सौतेली माँ हेलेन है, जो खुद भी अभिनेत्री थी, जो उनके साथ कई फिल्मो में सह-अभिनेत्री भी रह चुकी है. सलमान खान को दो भाई है, अरबाज़ खान जिन्होंने एक अभिनेत्री से शादी की जिसका नाम मल्लिका अरोरा खान है और दुसरे भाई सोहिल खान है और दो बहने अलविरा खान अग्निहोत्री जिसने अभिनेता अतुल अग्निहोत्री से शादी कर ली।

 सलमान खान ने अपने भाईयों अरबाज़ व सोहेल की ही तरह बांद्रा स्थित सेंट स्टेनिस्लॉस हाई स्कूल के माध्यम से अपनी स्कूली शिक्षा समाप्त की। इससे पहले उन्होंने ग्वालियर स्थित सिंधिया स्कूल में अपने छोटे भाई अरबाज़ से साथ कुछ वर्ष पढ़ाई की।

करियर

सलमान खान ने अपने अभिनय करियर की शुरूआत सहायक अभिनेता के तौर पर फिल्‍म 'बीवी हो तो ऐसी' से की थी। मुख्‍य अभिनेता के तौर पर उनकी पहली फिल्‍म 'मैंने प्‍यार किया' थी जो कि सुपरहिट रही थी। बॉलीवुड फिल्म में उनकी पहली प्रमुख भूमिका सूरज आर. बड़जात्या की रोमांस फिल्म ‘मैनें प्यार किया’ (1989) में थी। यह फिल्म भारत की सर्वाधिक कमाई वाली फिल्मों से एक फिल्म बन गई। इस फिल्म के लिए उन्हें फ़िल्मफ़ेयर का सर्वश्रेष्ठ नए अभिनेता का पुरस्कार मिला व ‘फिल्मफेयर सर्वश्रेष्ठ अभिनेता’ के पुरस्कार के लिए नामांकन भी प्राप्त हुआ।

निजी जीवन

सलमान खान एक समर्पित बॉडीबिल्डर हैं। वे प्रतिदिन मेहनत करते हैं और मूवी तथा स्टेज शो में अपनी कमीज उतारने के लिए प्रसिद्ध हैं। अमरीका की ‘People’ पत्रिका द्वारा वर्ष 2004 में इन्हें दुनिया का 7वां सबसे सुंदर पुरूष और भारत के सबसे सुंदर पुरूष का खिताब मिला। अपने कैरियर में खान विभिन्न धर्मार्थ संस्थाओं से जुड़े हुए हैं।[18] बहुत सी अभिनेत्रियों के साथ रोमांस और अपनी पूर्व प्रेमिका ऐश्वर्या राय, सोमी अली और संगीता बिजलानी के साथ संबंधों के बावजूद खान भारतीय मीडिया जगत में बालीवुड का सबसे चहेता कुंवारा अभिनेता बनता रहा है। वे 2003 से ही मॉडल से अभिनेत्री बनी कैटरीना कैफ के साथ डेटिंग करते आ रहे थे।

सलमान खान से जुड़ी दिलचस्‍प बातें

उनकी पहली फिल्‍म ‘मैंने प्‍यार किया’ को इंग्लिश में 'वेन लव काल्‍स' नाम से डब किया गया था जो कि गुयाना के कैरिबियन मॉर्केट में सबसे बड़ी हिट फिल्‍म रही थी।यह फिल्‍म और कई जगहों और भाषाओं में रिलीज की गई और हर जगह इसने कामयाबी के झंडे गाड़े।फिल्‍म 'तेरे नाम' उनके करियर की काफी अच्‍छी फिल्‍म रही। इस फिल्‍म को दर्शकों के साथ-साथ आलोचकों ने भी हिट करार दिया और यह फिल्‍म सलमान के करियर की बेस्‍ट फिल्‍म मानी जाती है।

2009 में आई फिल्‍म 'वांटेड' उनके करियर का टर्निंग प्‍वाइंट रही। इस फिल्‍म में से वे एक्‍शन फिल्‍मों के सुपरस्‍टार बन गए। 

सलमान ने कई लोगों की मदद की है वो चाहे इंडस्‍ट्री में पैर जमाने में मदद करना हो या फिर किसी को पैसों से। वे हमेशा सभी के सुख दुख में आगे आकर खड़े हुए हैं। कैटरीना कैफ, असिन, सेनाक्षी सिन्‍हा, अर्जुन कपूर, हिमेश रेशमिया ऐसे प्रमुख नाम हैं जिन्‍हें फिल्‍म इंडस्‍ट्री में सलमान ने बहुत मदद की है।सलमान खान ही वो अभिनेता थे जिन्‍होंने बिग बॉस को होस्‍ट किया और इसने भी टीआरपी के अपने पुराने सारे रिकार्ड तोड़े। इस रियलटी शो में सलमान द्वारा की जाने वाली होस्टिंग को खूब पसंद किया गया।जनवरी 2012 में भी उन्‍होंने लोगों की मदद तब की जब करीबन 400 कैदी अपने जेल में बिताए गए समय को तो पूरा चुके थे लेकिन सिर्फ इस वजह से बाहर नहीं आ पा रहे थे क्‍योंकि उन पर पैसों का भी जुर्माना लगा था। तब सलमान ने तकरीबन 400 मिलीयन की मदद की थी। उत्‍तर प्रदेश के 63 जेलों में से 400 कैदियों को उनके एनजीओ के जरिए रिहा कराया गया।2004 में यूएसए की पीपुल मैगजीन ने सलमान को दुनिया का सातवां सबसे हैंडसम आदमी का स्‍थान दिया था। 2008 में सलमान की वैक्‍स की मूर्ति को लंदन के मैडम तुसाद संग्राहलय में स्‍थापित किया गया और 2012 में एक बार फिर वैक्‍स की दूसरी मूर्ति को न्‍यूयार्क के मैडम तुसाद संग्राहलय में स्‍थापित किया गया।पिछले कुछ समय से कमाई के मामले में वे अन्‍य अभिनेताओं की अपेक्षा काफी आगे हो गए हैं। एक्‍शन फिल्‍मों में लोग उन्‍हें ज्‍यादा पसंद करते हैं। उन्‍हीं फिल्‍मों ने कमाई के नए कीर्तिमान स्‍थापित किए जिनमें वे एक्‍शन अवतार में थे।

Thursday, February 1, 2018

अक्षय कुमार का जीवन और सफलता कहानी Akshay kumar biography and success story hindi by-deshhindi.com

अक्षय कुमार
अक्षय कुमार (पंजाबी: ਅਕਸ਼ੈ ਕੁਮਾਰ, जन्म: राजीव हरी ओम भाटिया, 1 सितम्बर, 1967) अक्षय का असली नाम ‘राजीव हरिओम भाटिया’ है, एक मशहूर फिल्म अभिनेता होने के साथ साथ वे निर्माता और मार्शल आर्टस में भी पारंगत हैं। प्यार से लोग उन्हें ‘अक्की’ भी कहते हैं। अक्षय कुमार ने 125 से ऊपर फिल्मों में काम किया है। उन्हें कई बार उनकी फिल्मों के लिए फिल्मफेयर अवार्डस में नामांकित किया गया है जिसमें से दो बार उन्होंने यह पुरस्कार जीता हैै। हिन्दी फिल्म इंडस्ट्री में वह लंबे समय से काम कर रहे हैं और अपने अनुशासित स्वभाव और दिनचर्या के लिए भी जाने जाते हैं। ‘खिलाडि़यों के खिलाड़ी’ नाम से मशहूर अक्षय अपनी फिल्मों में ज्यादातर स्टंट स्वयं ही करते हैं।
करियर
मुख्य अभिनेता के तौर पर अक्षय के करियर की शुरूआत ‘सौगंध’ फिल्म से हुई। इसके पहले भी मार्शल आर्टस के प्रशिक्षक के रोल में उन्हें ‘आज’ फिल्म में मौका मिला लेकिन उसमें उनकी बिना श्रेय भूमिका थी। शुरूआती दौर में उनकी फिल्मों को खास प्रतिक्रिया नहीं मिली लेकिन उनकी खिलाड़ी सीरीज की फिल्मों ने उन्हें बाॅलीवुड का ‘खिलाड़ी कुमार’ बना 1997 में, यश चोपड़ा की हिट फ़िल्म दिल तो पागल हैमें मेहमान कलाकार की भूमिका निभाई, जिसके लिए उन्हें सर्वश्रेष्ठ सहायक कलाकार के लिए फिल्मफेयर पुरस्कार में नामांकन हुआ। उसी साल, वे खिलाड़ी श्रेणी के पांचवें फ़िल्म मिस्टर एंड मिसेज़ खिलाड़ी में हास्य भूमिका में नजर आए।खिलाड़ी टायटल के साथ उनकी पिछली फिल्मों की तरह, यह फ़िल्म हिट हुई। और इस तरह इस फ़िल्म की तरह, उनका अगला खिलाड़ी नाम से रिलीज सारी फिल्में आने वाले साल में बॉक्स ऑफिस पर हिट होते चला गया। 1999 में, कुमार को फ़िल्मसंघर्ष' और जानवर में उनके किरदार के लिए अच्छी सराहना मिली।जबकि पहली फिल्में बॉक्स ऑफिस पर सफल हो सकी, पर बाद में उन्हें सफलता मिली।
2000 में हास्य फ़िल्म ‘हेरा फेरी’ में अभिनय किया जो हर लिहाज से सफल रही,[10] और इस फ़िल्म में उन्होंने अपने आपको एक एक्शन और रोमांटिक भूमिकाओं की तरह एक सफल हास्य रोल भी अच्छी तरह निभाया।उन्होंने रोमांटिक फ़िल्म धड़कन में भी काम किया और बाद में उसी साल उसे काफ़ी सफलता मिली।[10] 2001 में, फ़िल्म ‘अजनबी’ में कुमार ने एक नकारात्मक किरदार निभाया। उनकी फ़िल्म को काफी सराहा गया तथा बेस्ट विलेन के लिए पहला फ़िल्मफेयर पुरस्कार मिला ।
हेरा फेरी की सफलता के बाद अक्षय कुमार ने कई हास्य फिल्मों में काम किया, जिनमें शामिल हैं ‘आवारा पागल दीवाना’(2002), ‘मुझसे शादी करोगी’ (2004) और गरम मसाला(2005)। यह फ़िल्म बॉक्स ऑफिस पर बेहद सफल रही और उनके अभिनय के लिए उन्हें सर्वश्रेष्ठ हास्य कलाकार का दूसरा‘फिल्मफेयर पुरस्कार’ मिला।
वर्ष 2007 अक्षय कुमार के लिए उनके कैरियर का इंडस्ट्री में सबसे ज्यादा सफल वर्ष रहा और बॉक्स ऑफिस के विश्लेषकों ने "शायद एक अभिनेता के लिए चार सीधे हित और बिना किसी फ्लॉप के शानदार वर्ष रहा।उनकी पहली रिलीज, नमस्ते लंदन, आलोचनात्मक दृष्टि व कामर्शियल दृष्टि से सफल रही।आलोचक तरण आदर्श ने फ़िल्म में उनके प्रदर्शन के बारे लिखा कि वे निश्चित रूप से फ़िल्म देखने लाखों दर्शकों का मन अपनी इस फ़िल्म के जरिये लेंगे।"उनकी दो अगली रिलीज हे बेबी औरभूल भुलैया दोनों बॉक्स ऑफिस पर सुपर हिट हुई। वर्ष का कुमार के लिए आखिरी रिलीज वेलकम थी जिसने बॉक्स ऑफिस पर अच्छा प्रदर्शन किया, ब्लोकबस्टर का अवसर मिला तथा साथ में वे पांचवीं लगातार हिट फ़िल्म देने वाले हीरो बन गए । उस वर्ष कुमार की जितनी भी फिल्में रिलीज हुई वह विदेशी बाजार में भी अच्छा प्रदर्शन किया।
अक्षय कुमार से जुड़ी रोचक बातें
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● अक्षय कुमार का असली नाम राजीव भाटिया है। वह आर्मी अफसर हरिओम भाटिया के बेटे हैं। अक्षय कुमार के होम प्रोडक्शन का नाम भी उनके पिता के नाम पर है- हरी ओम प्रोडक्शंस।
● अक्षय को बचपन से ही मार्शल आर्ट्स और तायकांडो का शौक था। वह तायकांडो में ब्लैक बेल्ट से सम्मानित भी किये जा चुकें हैं। उन्होंने बैंगकॉक में मुए थाई भी सीखा है।
● अक्षय कुमार फिल्म अभिनेता बनने से पहले बैंगकॉक में वेटर और कुक का काम करते थे।
● अक्षय कुमार हिंदी सिनेमा का जाना-माना नाम हैं, लेकिन वह इसका शो ऑफ़ कभी भी पब्लिकली नहीं करते, वो यही चीज अपने बच्चो को बताते हैं। इतना ही नहीं जब उन्होंने अपनी बेटी नितारा का एडमिशन प्ले स्कूल में कराया था. तो आम मां-बाप की तरह उन्होंने भी लाइन में लगकर अपनी बारी की प्रतीक्षा थी।
● अक्षय कुमार के पास पैसे की कमी नहीं है लेकिन वह महीने में सिर्फ पांच से दस हज़ार ही खर्च करते हैं।
● अक्षय कुमार शाम 7 बजे से पहले अपना डिनर करते हैं। उन्होंने एक इंटरव्यू में कहा, कि 7 बजे के आपकी शरीर कैलोरी को बर्न नहीं करती। मैं सुबह भी जल्दी उठता हूँ ताकि अपने रूटीन को फॉलो कर सकूँ।
● अक्षय कुमार नें अपने फ़िल्मी करियर में करीब आठ फिल्मों में विजय और सात फिल्मों में राज का किरदार निभाया है।
● कलर्स शो खतरों के खिलाडी होस्ट करने के अलावा वह नेशनल जियोग्राफिक चैनल के लिए मार्शल आर्ट्स डॉक्यूमेंट्री 'सेवन डेडली आर्ट्स विद अक्षय कुमार भी होस्ट कर चुके हैं।
● हिंदी सिनेमा में अक्षय का दूसरा नाम एक्शन खिलाड़ी है उसके पीछे भी एक कारण हैं। दरअसल हिंदी सिनेमा में अक्षय ने करीब आठ फ़िल्में की हैं जो खिलाड़ी नाम से हैं-खिलाडी, मैं खिलाडी तू अनाड़ी, खिलाड़ीयों का खिलाड़ी, इंटरनेशनल खिलाड़ी, सबसे बड़ा खिलाड़ी, मिस्टर एंड मिसेज खिलाड़ी, खिलाड़ी 420, खिलाड़ी 786।
अफेयर
1-अक्षय की पहली गर्लफ्रेंड पूजा बत्रा
कहा जाता है कि फिल्मों में आने से पहले अक्षय का अफेयर उस दौर की मशहूर मॉडल पूजा बत्रा के साथ था। यहां तक की दोनों की सगाई भी हो चुकी थी लेकिन फिल्मी दुनिया की चकाचौंध का असर इस रिश्ते पर पड़ा और दोनों अलग हो गए।
2-रेखा से भी रहा अफेयर
अपनी हमउम्र हीरोइन्स से रोमांस करने के लिए मशहूर अक्षय कुमार के अफेयर के चर्चे बॉलीवुड की एवरग्रीन हिरोइन रेखा के साथ भी सुनाई दिए। माना जाता है कि फिल्म 'खिलाड़ियों का खिलाड़ी' की शूटिंग के दौरान दोनों एक दूसरे के काफी करीब आ गए थे। रेखा उम्र में अक्षय से काफी बड़ी थीं। जिस वजह से यह अफेयर काफी कॉन्ट्रोवर्शियल रहा, हालांकि रेखा और अक्षय दोनों ने ही इस बारे में मीडिया में हमेशा कुछ भी कहने से बचते हुए नजर आएं।
3-रवीना के भी दीवाने रह चुके खिलाडी कुमार
शिल्पा शेट्टी से पहले अक्षय कुमार का अफेयर बॉलीवुड एक्ट्रेस रवीना टंडन के साथ था। रवीना टंडन अपने दौर की बेहद ग्लैमरस हिरोइंस की फेहरिश्त में शामिल थी। यह भी कहा जाता है कि जिस समय अक्षय रवीना को डेट कर रहे थे, ठीक उसी समय वह शिल्पा को भी डेट कर रहे थे। शायद इसी वजह से रवीना ने अक्षय से अपने रिश्ते को खत्म करना ही बेहतर समझा और दोनों की राहे एक-दूसरे से जुदा हो गईं।
5-पहले प्रेमिका बाद में पत्नी बनी ट्विंकल
17 जनवरी 2001 को ट्विंकल खन्ना के साथ शादी के बंधन में बंधे अक्षय आज एक खुशहाल शादीशुदा जिंदगी जी रहे हैं। लेकिन बहुत कम लोग ये बात जानते है कि अक्षय, ट्विंकल से शादी करने के मूड में नहीं थे, लेकिन ट्विंकल की मां डिपंल कपाड़िया के दबाव के आगे अक्षय कुमार को झुकना पड़ा और आखिरकार दोनों ने शादी कर ली। दोनों के दो बच्चे भी हैं। शादी के बाद अक्षय ने अपनी प्ले ब्वॉय इमेज छोड़ दी और आज दोनों खुशहाल जिंदगी बिता रहे हैं।

Saturday, December 30, 2017

albert einstein biography and success story -अल्बर्ट आइन्स्टाइन की और सफलता की कहानी


★★★ आधुनिक भौतिक विज्ञान के जन्मदाता अल्बर्ट आइन्स्टाइन ने भौतिक विश्व को उसके यतार्थ स्वरूपों में ही समझने का प्रयास किया था। इस सम्बन्ध में उन्होंने कहा था कि “शब्दों का भाषा को जिस रूप में लिखा या बोला जाता है मेरी विचार पद्दति में उनकी उस रूप में कोई भूमिका नही है। पारम्परिक शब्दों अथवा अन्य चिन्हों के लिए दुसरे चरण में मात्र तब परिश्रम करना चाहिए जब सम्बंधिकरण का खेल फिर से दोहराया जा सके ”।

★★ अल्बर्ट आइन्स्टाइन का प्रारम्भिक जीवन -

अल्बर्ट आइन्स्टाइन का जन्म 14 मार्च 1879 को जर्मनी के उल्क नामक छोटे से कस्बे में हुआ था। उनके पिता का नाम हर्मन आइन्स्टाइन और माता का नाम पौलिन था। पौलीन को अपने पुत्र से बहुत प्यार था और कभी वो उसको अपने से दूर नही करती थी। एल्बर्ट तीन वर्ष का हुआ तो उसकी माता के लिए एक समस्या खडी हो गयी कि वो बोलता नही था। सामान्यत: तीन वर्ष के बालक तुतलाकर बोलना सीख जाते है। फिर भी माँ ने उम्मीद नही छोडी और उसे पियानो बजाना सिखाया। बचपन में एल्बर्ट शांत स्वाभाव का और शर्मीला बच्चा था और उसका कोई मित्र नही था। वह अपने पडोस में रहने वाले बच्चो के साथ भी खेलना पसंद नही करता था। एल्बर्ट के माता -पिता म्यूनिख रहने लगे थे। बच्चे म्यूनिख की सडको पर सेना की परेड को देखकर उनकी नकल उतारा करते थे जबकि [Albert Einstein] अल्बर्ट सिपाहियों को देखते ही रोने लगता था।

उस समय दुसरे सभी बच्चे बड़ा होकर सिपाही बनने की बात करते थे लेकिन उसकी सिपाही बनने में कोइ रूचि नही थी। अब एल्बर्ट पांच वर्ष का हो गया था और उसके जन्मदिन पर उसके माता-पिता ने मैग्नेटिक कम्पस उपहार में दिया जिसे देखकर वो बहुत प्रसन्न हुआ था। जब उस मैग्नेटिक कम्पस की सुई हमेशा उत्तर दिशा की तरफ रहती तो उसके दिमाग में प्रश्न आते थे कि ऐसा कैसे और क्यों होता है। अल्बर्ट बचपन से ही पढने लिखने में होशियार था लेकिन शिक्षको के साथ उसका तालमेल नही बैठता था क्योंकि वो रटंत विद्या सीखाते थे। अल्बर्ट इसाई नही यहूदी था जिसके कारण स्कूल में इसाई लडके उसे परेशान करते थे इसी वजह से उसके दिमाग में अकेलेपन की भावना आ गयी थी। उसका बचपन में एक ही मित्र बना था जिसका नाम मैक्स टेमले था जिससे वो अपने मन की बाते करता था और तर्कसंगत प्रश्न करता रहता था। एक दिन अल्बर्ट ने मैक्स से पूछा कि “ये ब्रह्मांड कैसे काम करता है ” इसका उत्तर मैक्स के पास नेहे था। इस तरह बचपन से उसका भैतिकी में बहुत रूचि रही थी। एल्बर्ट के चाचा जैकब एक इंजिनियर थ जिन्होंने अल्बर्ट के मन में गणित के प्रति रूचि दिखाई थी।उन्होंने उसे सिखाया था कि जब भी बीजगणित में कुछ अज्ञात वस्तु को ढूँढना चाहते है तो उसे बीजगणित में X मान लेते है और तब तक ढूंढते रहते है जब तक कि पता नही लगा लेते है।

एल्बर्ट जब 15 वर्ष का हुआ तो उसके पिता के कारोबार में समस्याए आ गयी जिसके कारण उन्हें कारोबार बंद करना पड़ा। अब उसके माता पिता उसको जिम्नेजियम स्कूल में दाखिला दिलाकर नौकरी की तलाश में दुसरे शहर चले गये। अब माता पिता के जाने के बाद अल्बर्ट उदास रहने लगा और उसका पढाई में ध्यान नही लगा इसलिए वो भी अपने परिवार के पास इटली चला गया। इटली में उसने बहुत सुखद समय बिताया उसके बाद सोलह वर्ष की उम्र में अल्बर्ट को स्विज़रर्लैंड के एक स्कूल में पढने के लिए रखा गया। यहा पर उसने भौतिकी में गहरी रूचि दिखाना शुरू कर दिया और उसे योग्य अध्यापक भी मिले।यही पर उन्होंने सापेक्षता का सिद्धांत का पता लगाया था। एल्बर्ट ने ज्यूरिख से स्नातक की डिग्री प्राप्त की थी।

★★ अल्बर्ट आइन्स्टाइन अध्यापक के रूप में -

स्नातक की डिग्री लेने के बाद उन्होंने विद्यार्थियों को पढ़ाने के बारे में विचार किया लेकिन अल्बर्ट के अधिक ज्ञान की वजह से प्रारम्भ में उन्हें नौकरी नही मिली। सन 1902 में अल्बर्ट आइन्स्टाइन को स्विज़रलैंड के बर्न शहर में एक अस्थाई नौकरी मिल गयी। अब उन्हें अपने शोध लेखो को लिखने और प्रकाशित कराने का बहुत समय मिला। उन्होंने डॉक्टरेट की डिग्री प्राप्त करने के लिए मेहनत करना शुरू कर दिया और अंत में उन्हें डाक्टरेट की उपाधि मिल ही गयी।

★★ अल्बर्ट आइन्स्टाइन वैज्ञानिक के रूप में -

ज्यूरिख विश्वविद्यालय में उनको प्रोफेसर की नियुक्ति मिली और लोगो ने उन्हें महान वैज्ञानिक मानना शुरू कर दिया। सं 1905 में 26 वर्ष की आयु में उन्होंने सापेशिकता का सिद्धांत प्रतिपादित किया जिसने उन्हें विश्वविख्यात कर दिया। इस विषय पर उन्होंने केवल चार लेख लिखे थे जिन्होंने भौतिकी का चेहरा बदल दिया। इस सिद्धांत का प्रसिद्ध समीकरण E=mc2 है जिसके कारण ही परमाणु बम बन सका। इसी के कारण इलेक्ट्रिक ऑय की बुनियाद रखी गयी। इसी के कारण ध्वनि चलचित्र और टीवी पर शोध हो सके। आइन्स्टाइन को अपनी इसी खोज के लिए विश्व प्रसिद्ध नोबल पुरुस्कार मिला था। सारा संसार आइन्स्टाइन की प्रशंशा करने लगा और जगह जगह पर समारोह आयोजित किये जाने लगे। इतना सब कुछ होने के बाद भी वो हमेशा नम्रता से रहते थे। आइन्स्टाइन विश्व शान्ति और समानता में विश्वास रखते थे इसी कारण उन्हें गांधीजी की तरह महान पुरुष कहा जाता था। आइन्स्टाइन को अपने जीवन में सबसे ज्यादा दुःख तब हुआ जब उनके वैज्ञानिक अविष्कारों के कारण बाद में परमाणु बम का आविष्कार हुआ था जिससे हिरोशिमा और नागासाकी जैसे नगर ध्वस्त हो गये थे।

★★ आइन्स्टाइन का परिवार -

1903 में अल्बर्ट आइन्स्टाइन का विवाह मिलवा मैरिक हे हुआ था। उनके यहा दो पुत्रो एल्बर्ट और एडूआई ने जन्म लिया था। आइन्स्टाइन के विवाह से पहले भी के पुत्री थी जिसे आइन्स्टाइन ने गोद लिया था लेकिन उसकी बचपन में ही मौत हो गयी थी। 14 फरवरी 1919 ने उनका मैरिक से तलाक हो गया और इसी वर्ष में उन्होंने दुसरी शादी कर ली थी। उनकी दुसरी पत्नी का नाम एलसा था लेकिन वो भी 1936 में चल बसी। वैसे भी उनकी पारिवारिक जीवन में रूचि कम थी और अपना ज्यादातर समय अपनी वैज्ञानिक खोजो में लगाते थे।

★★ आइन्स्टाइन की मृत्यु -

18 अप्रैल 1955 में महान वैज्ञानिक अल्बर्ट आइन्स्टाइन की अमेरिका के न्यू जर्सी शहर में मृत्यु हो गयी। वह अपने जीवन एक अंत तक कार्य करते रहे उअर मानवता की भलाई में उन्होंने अपना जीवन समर्पित कर दिया था। इतना सब होने के बाद भी वो किसी के घनिष्ट मित्र नही बन सके क्योंकि उनका लक्ष्य हमेशा सृष्टि को जानने का रहा था।आइन्स्टाइन की प्रतिभा से प्रभवित होने के कारण मृत्यु के बाद उनके दिमाग का अध्यययन किया गया लेकिन कुछ विशेष तथ्य हाथ नही आये।

Friday, December 29, 2017

Walt Disney Biography in Hindi वाल्ट डिज्नी की जीवनीBy deshhindi.com

Micky mouse ये नाम किसी  भी इंसान से अनजाना नही हे़ै. शायद ही कोई इंसान होगा जिसने बचपन मे ये cartoon ना देखा हो आज मे आपको Micky mouse के रचेता Walt Disney की Biography in Hindi वाल्ट डिज्नी की जीवनी की कहानी

★★★ वाल्ट डिज्नी का जन्म 5 सितम्बर 1901 को शिकागो में हुआ था। वो पांच भाई बहन थे। वाल्ट डिज्नी को बचपन से ही चित्रकला का बहुत शौक था। उन्होंने 7 वर्ष की आयु में ही अपना पहला चित्र अपने पडौसी को बेचा था। स्कूल के दौरान उन्होंने चित्रकला और फोटोग्राफी सीखी और एक पत्र के सम्पादक भी रहे। उन्होंने अकैडमी आफ फाइन आर्ट्स के रात्रि स्कूल में दाखिला ले लिया। स्नातक की उपाधि पाने के बाद वो सेना में जाना चाहते थे लेकिन कम उम्र की वजह से नही जा सके। इसके बाद वाल्ट डिज्नी रेडक्रॉस में शामिल हो गये और एम्बुलेंस चलाने लगे। कहते है कि उन्होंने एम्बुलेंस को रंग-बिरंगे कार्टूनों से सजा रखा था। कानवास सिटी लौटने के बाद उन्होंने विज्ञापनों के लिए कार्टून बनाना शूरू कर दिया। 1920 में वो कार्टून एनिमेटर बन गये। उन्होंने कड़ी मेहनत से ऐसी प्रक्रिया तैयार कर ली जिससे लाइव एक्शन और एनीमेशन का खुबसुरत मेल था।

कुछ वर्ष बाद वाल्ट डिज्नी अपनी ड्राइंग सामग्री और एक सम्पूर्ण एनीमेशन फिल्म में साथ हॉलीवुड आ पहुचे। तब तक वे अपनी एक कर्मचारी लिलियन से विवाह कर चुके थे और उनकी जुड़वाँ पत्निया थी। 1928 में वो मिक्की माउस पात्र के साथ सामने आये। उन्होंने “Plane Crazy ” नामक पहला मूक कार्टून बनाया। फिल्मो में उस समय तक आवाज की तकनीक विकसित नही हुयी थी। “स्टीम बिली ” में उन्होंने मिक्की माउस को एक स्टार की तरह पेश किया। 18 नवबर 1928 को न्यूयार्क में यह कार्टून दिखाया गया।

वाल्ट डिज्नी वाल्ट एक स्वप्नदर्शी अन्वेषक थे। वो अपने बेहतरीन एनीमेशन फिल्मो के लिए जुटे रहे। सिली सिफ्नीज के दौरान टैक्नीकलर एनीमेशन सामने आया। 1932 में “Flowers and Trees ” के लिए उन्होंने बत्तीस में से पहला निजी एकादमी पुरुस्कार जीता। 21 सितम्बर 1933 को उनकी पहली लम्बी एनीमेशन फिल्म “Snow White and Seven Dwarfs ” लोस एंजेल्स के “कैरेथे सर्किल थिएटर ” में दिखाई गयी। फिल्म काफी महंगी थी परन्तु इतनी लोकप्रिय हुयी अपने व्यय से कही ज्यादा धनोपार्जन किया। व अब भी “Motion फिल्म Industry” की सबसे बड़ी फिल्म मानी जाती है। अगले पांच सालो में “पिनोकियो ” “फंतसिया” “डम्बो” और “बाम्बी ” जैसी सफल फिल्मे बनाई। वाल्ट डिज्नी वाल्ट डिज्नी ने इन फिल्मो के अलावा टीवी के लिए भी कई सफल पारिवारिक शो तैयार किये। 50 के दशक में “Mickey Mouse Club ” और “जोरो ” काफी लोकप्रिय रहे।

वाल्ट डिज्नी ने अपनी कल्पना से विश्व को आश्चर्य में डाल दिय। उन्होंने पुरी दुनिया से 950 से भी अधिक पुरुस्कार एवं सम्मान प्राप्त किये। उन्हें सात अकादमी और सात एमी पुरूस्कार पप्राप्त हुए। अनेक जाने माने विश्वविध्यालय ने उन्हें मांनद उपधिया प्रदान की। 1955 में उन्होंने 17 मिलियन के निवेश से “DisneyLand” तैयार किया। 1980 तक 250 मिलियन लोग वहा जा चुके थे। पुरी दुनिया की गणमान्य हस्तिया वहा जाकर मनोरंजन करने का सौभाग्य पा चुकी है। वाल्ट सही मायनों में कल्पना के जादूगर थे। 15 दिसम्बर 1966 को वाल्ट डिज्नी का निधन हो गया।

Saturday, December 23, 2017

अलीबाबा ग्रुप के मालिक जैक मा की सफलता की कहानी और संघर्ष की दास्तान The History Of Alibaba Faundar


★★★ अगर देखा जाए तो दुनिया में रोज बहुत सारे लोग नौकरी से निकाले जाते हैं या नौकरी पाने के लिए कंपनियों के दरवाजे खटखटाते हैं। उनमें से कुछ लोगों को नौकरी मिलती है और कुछ को नहीं। लेकिन दुनिया में कुछ लोग ही ऐसे होते हैं जो नौकरी न मिलने पर खुद की कंपनी खोलने के बारे में सोचते हैं। इन्हीं लोगों में से एक जुनूनी, मेहनती, काम करने के लिए एक हद तक पागल व्यक्ति का नाम जैक मा है जो चीन के सबसे अमीर लोगों में से एक हैं। जिन्होने चीन की सबसे बड़ी ई कॉमर्स साइट(E Commerce Site) अलीबाबा का निर्माण किया। एक बार KFC में नौकरी के लिए जब KFC पहली बार जैक मा का शहर में आया था। इस नौकरी के लिए 24 लोगो ने आवेदन किया था जिसमे से 23 लोगो को चयन हो गया लेकिन एकमात्र जैक मा का चयन नही हुआ। आप इसी बात से अंदाज़ा लगा सकते की उन्होने अपने जीवन मे कितनी ठोकरे खाई हैं। आइए जानते हैं जैक मा का अर्श से पर्श तक जाने की कहानी।

★★ प्रारंभिक जीवन / पृष्टभूमि -

जैक मा का जन्म 10 सितंबर 1964 को चीन के ज़ेजिआंग प्रान्त के हन्हाजु गाँव में हुआ था। जैक मा के माता-पिता का पारम्परिक नाटक और कहानिया सुनाने का काम किया करते थे इसी से इनकी जीविका चलती थी। जैक मा को बचपन से ही अंग्रेजी सीखने की इच्छा थी। अंग्रेजी सीखने के लिए उन्होंने किसी शिक्षक का सहारा नहीं लिया। वे प्रतिदिन सुबह साइकिल से घर के पास की होटल पर जाते थे जहाँ अक्सर विदेशी नागरिक ठहरते थे। जैक मा शुरवात में उनके साथ टूटी फूटी अंग्रेजी में बात करते थे क्योंकि चीन में चीनी मुख्य भाषा थी और अंग्रेजी सीखना जरुरी नही माना जाता था। अब वो अपने खाली समय में विदेशी लोगो को मुफ्त में शहर का गाइड करते थे। जिससे उनकी प्रेक्टिस भी होती थी और उनकी अंग्रेजी में भी सुधार होता गया। उन्होंने नौ सालो तक यही काम किया। एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा था कि इस दौरान उन्होंने ना केवल अंग्रेजी सीखी बल्कि पश्चिमी लोगों के तकनीक और स्टाइल को भी सीखा।

इन विदेशियों को गाइड करते समय एक विदेशी मित्र से उनकी गहरी मित्रता हो गयी। जो जाने के बाद उन्हें पत्र लिखा करता था और उसी विदेशी मित्र ने उन्हें “जैक” नाम दिया क्योंकि चीनी में उनका नाम बोलना और लिखना बड़ा कठिन था। तब से उनको जैक के नाम से ही जाना जाता है। हालांकि जैक मा पढाई में बिलकुल अच्छे नहीं थे वो पांचवीं कक्षा में ही दो बार फेल हो गए थे। और आठवीं कक्षा में भी वो तीन बार फेल हो गए थे। बाद में बड़े होने पर जब उन्होंने विश्वविद्यालय प्रवेश परीक्षा दी तो तीन बार इस परीक्षा में फेल हो गये। प्रसिद्ध हार्वर्ड यूनिवर्सिटी ने उन्हें 10 बार रिजेक्ट किया। उसके बाद जैक ने हंजाऊ टीचर्स इंस्टिट्यूट में दाखिला लिया, जहा से 1988 में उन्होंने अंगरेजी में स्नातक परीक्षा उतीर्ण की। स्कूल के दौरान जैक को विद्यार्थी परिषद का अध्यक्ष चुना गया था। स्नातक के बाद में वो हंजाऊ यूनिवर्सिटी में अंग्रेजी और अन्तराष्ट्रीय व्यापार के लेक्चरर बन गये।

★★ करियर की शुरुवात -

जैक मा ने करियर की शुरुवात काफी कठिन और चुनौतीपूर्ण रहा। जैक मा ने 30 अलग अलग जगहों पर नौकरी के लिए आवेदन किये लेकिन हर बार उन्हें निराशा ही हाथ लगी। जैक मा सबसे पहले एक पुलिस की नौकरी के लिए आवेदन किया था लेकिन ढीला-ढाला देखकर उन्हें साफ मना कर दिया। इसके बाद उन्हे केएफसी(KFC) ने भी रिजेक्ट कर दिया। जैक इंटरनेट की दुनिया में बिजनेस करने से पहले एक ट्रांसलेशन कंपनी चलाते थे। 1994 में जैक मा ने पहली बार इन्टरनेट का नाम सूना। जिसके बाद वे अमेरिका गए और वहां उन्होंने इंटरनेट देखा और उन्होंने सबसे पहला शब्द इंटरनेट पर Beer (भालू) टाइप किया। उनके सामने कई देशों के बीयर ऑप्शन दिखे लेकिन चाइनीज बीयर नहीं दिखा। अगले बार उन्होंने चीन के बारे में सामान्य जानकारी ढूंढने की कोशिश की लेकिन फिर वो चौंक गये कि चीन को कोई जानकारी इन्टनेट पर उपलब्ध नही थी। अपने देश की जानकारी इंटरनेट पर ना होने से जैक को काफी दुखी हुई। क्योंकि इससे उन्हें लग गया था कि चीन तकनीकी क्षेत्र में अन्य देशो से काफी पीछे है।

इसी वजह से उन्होंने अपने दोस्तो के साथ मिलकर चीन की जानकारी देने वाली पहली वेबसाइट “अग्ली” (Ugly) बनाई। इस वेबसाइट के बनाने के महज पांच घंटो के अंदर उन्हें कुछ चीनी लोगो के ईमेल आये जो जैक के बारे में जानना चाहते थे। तब जैक मा को एहसास हुआ कि इन्टरनेट से बहुत कुछ किया जा सकता। 1995 में जैक मा ,उनकी पत्नी और दोस्तों ने मिलकर 20,000 डॉलर इखट्टे किये और एक कम्पनी की शुरुवात की। इस कम्पनी का मुख्य काम था दुसरी कंपनियों के लिए वेबसाइट बनाना। उन्होंने अपनी कम्पनी का नाम “चयना येल्लो पेजस” (China Yellow Pages) रखा था। इस कंपनी को शुरू करने के लिए जैक ने अपनी बहन से पैसे उधार लिए थे। लेकिन यह कंपनी फेल हो गई। इसके बाद उन्होंने चीन की कॉमर्स मिनिस्ट्री में काम किया जिसमे वे अध्यक्ष पद मे थे। कुछ दिनों के बाद नौकरी छोड़ दी, जिसके बाद वे अपने घर हैंग्जू चले गए और जहा उन्होंने अपने 17 दोस्तों के साथ मिलकर अलीबाबा (Alibaba) की शुरुआत की। अलीबाबा कंपनी की सफलता का अंदाजा इसी बात से लगया जा सकता है कि इस कंपनी ने अपना आईपीओ 4080 रुपए (68 डॉलर) पर पेश किया था और मार्केट खत्म होने पर इसकी कीमत 5711 रुपए (93.89 डॉलर) हो गई थी. इसे अमेरिका का अब तक का सबसे बड़ा आईपीओ बताया जा रहा है। उनकी निजी संपत्ति की कीमत करीब 130800 करोड़ रुपए है। Global e-commerce system को सुधारन के लिए 2003 में जैक मा ने Taobao Marketplace की स्थापना की।

जिसके बढ़ते प्रभाव को देखते हुए eBay ने इसे खरीदने का ऑफर दिया। लेकिन जैक मा ने eBay का प्रस्ताव ठुकरा दिया और इसकी बजाय उसने याहू (Yahoo) के को-फाउंडर जेरी से 1 बिलियन डॉलर की सहायता ली। चीन के सबसे अमीर इस व्यक्ति ने एक वक्त ऐसा भी देखा था जब उन्हें केएफसी (KFC) ने नौकरी देने से मना कर दिया था अभी की हकीकत यह है कि अलीबाबा.कॉम (Alibaba.com) के नाम से मशहूर यह कंपनी दुनिया भर के 190 कंपनियों से जुड़ी हुई है। अलीबाबा.कॉम वेबसाइट के अलावा तओबाओ.कॉम (Taobao.com) चलाती है जो चीन की सबसे बड़ी शॉपिंग वेबसाइट है। इसके अलावे चीन की बड़ी जनसंख्या को इनकी वेबसाइट तमल्ल.कॉम (Tmall.com) ब्रांडेड चीजें मुहैया कराती हैं। यही नहीं, चीन में ट्विटर जैसी सोशल मीडिया सिना वाइबो (Sina Weibo) में भी इस कंपनी की बड़ी हिस्सेदारी है। इसके साथ ही यूट्यूब जैसी वीडियो शेयरिंग वेबसाइट यौकू टुद्ौऊ (Youku Tudou) में भी इसकी अहम हिस्सेदारी है। ये कंपनियां मार्केटिंग, क्लाउड कंप्यूटिंग और लोजिस्ट सेवाएं देती हैं। अलीबाबा कंपनी के शुरुआती दिनों में सिर्फ 18 लोग काम करते थे और अभी करीब 22 हजार लोग काम करते हैं।

★★ निजी जीवन / शादी -

जैक मा ने जेंगयिंग (Zhang Ying) से शादी की थी और उनके एक पुत्र एवं एक पुत्री है। जैक अपनी पत्नी से पहली बार तब मिले जब वो Hangzhou Normal University में पढ़ रहे थे। स्नातक होने के बाद तुरंत 1980 के दशक में दोनों ने शादी कर ली और दोनों ने ही अध्यापक का काम शूरू कर दिया था जैक के बारे में उनकी पत्नी जैंग यिंग का मानना है ‘जैक हैंडसम नहीं है, लेकिन मुझे उनसे इसलिए प्यार हो गया, क्योंकि वे ऐसे कई काम कर सकते हैं जो हैंडसम पुरुष भी नहीं कर सकते’।

★★ सम्मान और पुरूस्कार -

1. 2004 में जैक मा को China Central Television द्वारा Top 10 Business Leaders of the Year चुना गया।

2. 2005 में जैक मा को वर्ल्ड इकनोमिक फोरम द्वारा Young Global Leader चुना गया और फार्च्यून पत्रिका में 25 Most Powerful Business people in Asia में नाम दिया गया।

3. 2007 में बिज़नस वीक पर उन्हें Businessperson of the Year चुना गया।

4. 2008 में जैक मा को World’s Best CEOs की 30 लोगो की लिस्ट में चुना गया।

5. 2009 में टाइम मैगज़ीन द्वारा जैक को विश्व के “100 सबसे प्रभावशाली व्यक्तियों” की सूची में रखा गया और इसी साल उन्हें फ़ोर्ब्स चीन की तरफ से Top 10 Most Respected Entrepreneurs in China चुना गया।

6. 2010 में जैक मा को फ़ोर्ब्स एशिया द्वारा प्राकुतिक आपदा प्रबधन और गरीबी उन्मूलन कार्यो के लिए Asia’s Heroes of Philanthropy में से एक चुना गया।

7. 2013 में जैक मा को Hong Kong University of Science and Technology द्वारा डॉक्टरेट की उपाधि दी गयी।

8. 2014 में फ़ोर्ब्स द्वारा विश्व के पशक्तिशाली व्यक्तियों की सूची में 30वा स्थान दिया गया।

9. 2015 में जैक को The Asian Awards में Entrepreneur of the Year से नवाजा गया।

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